हाइपरथायरायडिज्म कैसे ठीक करें?HealthPlanet

Posted on Wed 30th Nov 2022 : 15:30

हाइपरथायरायडिज्म के घरेलू उपचार
हाइपरथॉयराइडिज्म क्या है?

यह थाइरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता के कारण होने वाला रोग है। इसकी अतिसक्रियता के कारण T4 और T3 हार्मोन का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है। जब इन हार्मोन्स का उत्पादन अधिक मात्रा में होने लगता है तो शरीर ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में करने लगता है। इसे ही हाइपरथॉयराइडिज्म (Hyperthyroidism) कहते है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है।

बड़ों की तुलना में बच्चों में थायराइड की समस्या कम पाई जाती है लेकिन यदि बच्चों में यह समस्या हो जाए तो यह ज्यादा गंभीर स्थिति हो जाती है क्योंकि इससे सीधा-सीधा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर असर पड़ता है जन्म के बाद प्रत्येक नवजात की TSH (Thyroid Stimulating hormone in hindi) की जाँच जरुरी है। थाइरॉइड हार्मोन के विकार के चलते बच्चों में मानसिक विकलांगता आने का भय रहता है। थायरॉइड ग्रन्थि की अतिसक्रियता यानी बच्चें में हाइपरथॉयराइडिज्म (Hyperthyroidism) बहुत कम देखा जाता है एवं यह एकदम जन्म लिए हुए शिशुओं में होता है इसलिए इसे Neonatal हाइपरथॉयराइडिज्म कहते है।

यह तब होता है यदि माता को पहले से ही ग्रेव डिजीज (Grave’s disease) हो इसके कारण माता के रक्त में मौजूद थाइरो-स्टीमूलेटिंग एंटीबॉडिज (Thyroi-stimulating antibodies) उसके प्लेसेंटर(Placentr) को पार कर के गर्भ शिशु की थायरॉइड ग्रन्थि को उत्तेजित करते है और थायरॉइड हार्मोन का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है। सामान्य तौर पर यह एंटीबॉडिज(antibodies) कम मात्रा में ही होती है इसलिए इससे शिशु को कोई खास नुकसान नहीं पहुँचता।

इसमें किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि दो से तीन महीने के अन्दर स्वत ही यह एंटीबॉडिज शिशु के रक्त से हट जाती है। परन्तु कुछ स्थितियों में इन स्टीमूलेटिंग एंटीबॉडीज का स्तर ज्यादा हो जाता है जिस कारण गंभीर थायरोक्सिोकोसीस (Thyrotoxicosis) की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति में तुरंत ही उपचार की आवश्यकता होती है। शिशुओं में हाइपरथॉयराइडिज्म के लक्षण व्यस्कों के समान पाए जाते है जैसे हृदयगति का सामान्य से अधिक चलना, चिड़चिड़ापन, लाल एवं नमीयुक्त त्वचा होना आदि। कुछ समय चिकित्सा करने पर यह स्थिति सामान्य हो जाती है।
हाइपरथॉयराइडिज्म से बचने के उपाय

आम तौर पर असंतुलित भोजन और जीवनशैली के कारण हाइपरथॉयराइडिज्म की समस्या (hyperthyroidism symptoms)होती है। इसके लिए अपने जीवनशैली और आहार में कुछ बदलाव लाने पर हाइपरथॉयराइडिज्म की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है।

–थायरॉइड रोग में कम वसा वाले आहार का सेवन करें।
-ज्यादा से ज्यादा फलों एवं सब्जियों को भोजन में शामिल करें। विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, इनमें उचित मात्रा में आयरन होता है जो थायरॉइड के रोगियों के लिए फायदेमंद है।
-पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें, मिनरल्स और विटामिन से युक्त भोजन लेने से थायरॉइड कन्ट्रोल से मदद मिलती है।
-आयोडीन युक्त आहार का सेवन करें।
-नट्स जैसे बादाम, काजू और सूरजमुखी के बीजों का अधिक सेवन करें, इनमें कॉपर की पर्याप्त मात्रा होती है जो कि थायरॉइड में फायदेमंद होता है।
-दूध और दही का अधिक सेवन करें।
-विटामिन-ए का अधिक सेवन करें, गाजर खाएँ।
-जंक फूड एवं प्रिजरवेटिव युक्त आहार का सर्वथा त्याग कर दें।
-नियमित रूप से प्राणायाम एवं ध्यान करें।
-तनाव मुक्त जीवन जीने की कोशिश करें।
-योगासन करें।
-धूम्रपान, एल्कोहल आदि नशीले पदार्थों से बचें।
-साबुत अनाज का सेवन करें इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं।
-मुलेठी में मौजूद तत्व थायरॉइड ग्रन्थि को संतुलित बनाते हैं। यह Thyroid में Cancer को बढ़ने से भी रेकता है।
-गेहूँ और ज्वार का सेवन करें।


हाइपरथॉयराइडिज्म से बचने के घरेलू उपाय

आमतौर पर हाइपरथॉयराइडिज्म से राहत पाने के लिए लोग पहले घरेलू नुस्खों पर ही ऐतबार करते हैं। चलिये ऐसे कौन-कौन-से घरेलू उपाय और आयुर्वेदिक उपाय हैं जो हाइपरथॉयराइडिज्म (hyperthyroidism in hindi) दूर करने में सहायता करते हैं-

आयुर्वेद में थायरॉइड से सम्बन्धित रोग को अवटु ग्रंथि विकार कहा गया हैं। अनुचित आहार-विहार एवं तनाव पूर्ण जीवन व्यतीत करने की वजह से यह विकार देखा जाता है, इसमें वात, पित्त व कफ का असंतुलन तथा मुख्य रूप से वात एवं कफ की दुष्टि होती है। ऐसे में आयुर्वेदीय उपचार द्वारा इन दोषों को सन्तुलित अवस्था में लाया जाता है, अवटु ग्रंथि से स्रवित होने वाले हार्मोन्स जिनका थायरॉइड रोग में अति स्राव या अल्प स्राव होता है वह इस उपचार द्वारा नियत्रित होते है।

एलोपैथिक चिकित्सा में इस विकार के लिये स्टेरॉइड्स का सेवन कराया जाता है जो कि हानिकारक है। अत: आयुर्वेदिक चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा होने के कारण श्रेष्ठ है, इसमें वर्णित औषधियाँ जैसे गुग्गुलु, आँवला, कांचनार, गोक्षुर तथा शिलाजीत थायरॉइड रोग में बेहद फायदेमंद है।
हल्दी के सेवन से हाइपरथॉयराइडिज्म से मिले राहत

दादी-नानी के जमाने से हल्दी दूध का प्रयोग भिन्न-भिन्न बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता रहा है। इसी तरह प्रतिदिन दूध में हल्दी पका कर पीने से हाइपरथॉयराइडिज्म के लक्षणों (hyperthyroidism symptoms)से आराम मिलता है।
लौकी के सेवन से हाइपरथॉयराइडिज्म का इलाज

वैसे तो माना जाता है कि लौकी पेट को शांत रखने में मदद करने के साथ-साथ पाचन शक्ति को भी बेहतर करती है। शायद आपको पता नहीं कि लौकी के जूस का नियमित सेवन हाइपरथॉयराइडिज्म (hyperthyroidism in hindi) से राहत दिलाने में भी मदद करती है।
तुलसी और ऐलोवेरा के सेवन से हाइपरथॉयराइडिज्म में मिले राहत

एलोवेरा और तुलसी के फायदों के बारे में जितना कहे उतना कम होगा। दोनों न सिर्फ त्वचा संबंधी या सर्दी-खांसी समस्याओं से निजात (home remedies for hyperthyroidism)दिलाने में मदद करते हैं वरन् हाइपरथॉयराइडिज्म से राहत दिलाने में भी मदद करते हैं। दो चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिला कर सेवन करने से मिलता है फायदा।
काली मिर्च से करें हाइपरथॉयराइडिज्म का इलाज

काली मिर्च एक ऐसा मसाला है जो हर रसोईघर में मिल जाता है, लेकिन आपको पता नहीं होगा कि हाइपरथॉयराइडिज्म के उपचार (home remedies for hyperthyroidism) में यह कितना फायदेमंद होता है। हाइपरथॉयराइडिज्म के मरीजों के लिए काली मिर्च भी बहुत फायदेमंद होता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार काली मिर्च का सेवन करें।
अश्वगंधा चूर्ण हाइपरथॉयराइडिज्म में फायदेमंद
अश्वगंधा के गुणों के बारे में क्या कहे। सदियों से अश्वगंधा का प्रयोग तरह-तरह के बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। हाइपरथॉयराइडिज्म से राहत पाने के लिए रात को सोते समय एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गाय के गुनगुने दूध के साथ लेने से जल्दी आराम मिलता है।
मुलेठी हाइपरथॉयराइडिज्म से दिलाये राहत

शोध के अनुसार मुलेठी में पाया जाने वाला प्रमुख घटक ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीयेनिक एसिड अत्यधिक आक्रामक होता है जो थाइरॉडी कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

जब हाइपरथॉयराइडिज्म के लक्षण नजर आने लगे और स्थिति दिन ब दिन खराब हो रही हो तो बिना देर किये डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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